स्टार्टअप्स के लिए क्यों जरूरी है लोकलाइजेशन, और इसे कैसे कराएं? Localization for Startups, Hindi Article

Localization for Startups, Hindi Article

यह बात बेहद साफ़ है कि भारत अब स्टार्टअप्स का हब (Startups Hub) बन चुका है. एक आँकड़े के अनुसार, सिर्फ अमेरिका और चीन ही इंडिया से इस मामले में आगे हैं. हाल-फ़िलहाल में भारत में कुल 100 कंपनियां ऐसी हो गई हैं, जिनकी वैल्यू एक बिलियन डॉलर से ज्यादा है. इस कड़ी में 65 हजार से अधिक स्टार्टअप्स एक बिलियन डॉलर की वैल्यू छूने की तमन्ना लिए स्टार्टअप्स की दुनिया में अपने सुपर प्रयास जारी रखे हुए हैं. अर्थात न केवल स्टार्टअप, बल्कि यूनिकॉर्न बनाने में भी भारत का विशिष्ट योगदान सुनिश्चित हो रहा है.

स्टार्टअप में जो सबसे बड़ा फैक्टर मैटर करता है, वह है तेज स्पीड के साथ तेज ग्रोथ!

अगर आपने रैपिड ग्रोथ नहीं दिखलाई, तो बहुत मुमकिन है कि आपके सर्वाइवल के चांस बेहद कम हो जायेंगे, और अगर आप की ग्रोथ तेज होती है, तो निश्चित रूप से इससे न केवल आपकी टीम का, बल्कि इन्वेस्टर्स और क्लाइंट्स का भी उत्साह उसी तेज गति से बढ़ पायेगा. 

चूंकि स्टार्टअप कल्चर मोस्टली बाहर से आया हुआ है, और इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अभी भी स्टार्टअप कल्चर में इंग्लिश लैंग्वेज का ही नहीं, बल्कि इंग्लिश कल्चर का भी बोलबाला है.

पर पहले से अब की स्थिति में थोड़ा बदलाव जरूर देखने को मिल रहा है, और यह बदलाव इसलिए भी आ रहा है, क्योंकि पहले जहां शहरी वर्ग में, एक निश्चित ऑडियंस तक ही पहुंचने की सोच रहती थी, वहीं अभी के समय में स्टार्टअप अनलिमिटेड ग्रोथ की अपॉर्चुनिटी देख रहे हैं. जाहिर तौर पर अनलिमिटेड और सुपर स्पीड की ग्रोथ पाने के लिए बड़े शहरों से बाहर निकल कर टियर 2 सिटीज, और कई बार कस्बों और गांव तक पहुंचने की स्ट्रेटजी बन रही है. ऐसे में अगर आप स्टैंडर्डाइजेशन (Standardization) के माइंडसेट से ही अपने स्टार्टअप को बढ़ाते हैं, तो कहीं ना कहीं आप अपने टीजी अर्थात टारगेट ग्रुप को सीमित कर लेते हैं. ऐसी स्थिति में तेज ग्रोथ की संभावनाओं पर गहरा असर दिखाई पड़ता है.

ऐसे में बहुत सारे स्टार्टअप लोकलाइजेशन (Startup Localization) की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. खासकर भारत में तो यह और भी ज्यादा रेलेवेंट हो जाता है. चूंकि अंग्रेजी अभी देश के एक सीमित वर्ग तक की ही पहुंच रखती है,  जबकि देश की बहुसंख्यक आबादी (Startup Target Groups) लोकलाइजेशन के माध्यम से ही एप्रोच की जा सकती है.

ऐसे में लोकलाइजेशन आपके स्टार्टअप को हेल्प तो करेगा, पर यह किस प्रकार से हेल्प कर सकता है, आइये जानते हैं!

पैन इंडिया प्रजेंस (PAN India Presence of your Startup)

लोकलाइजेशन का सबसे बड़ा फायदा यही है कि आप एक सीमित दायरे से बाहर निकल कर पूरे भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आप अपनी पहचान न केवल बढ़ा सकते हैं,  बल्कि लोकलाइजेशन के जरिये उसको मजबूत भी कर सकते हैं.

कल्पना कीजिए कि आप अपने वेबसाइट / एप्लीकेशन या अपने किसी अन्य स्टार्टअप मॉडल को अभी तक इंग्लिश में ही प्रेजेंट करते रहे हैं और अगर आप फैसला लेते हैं कि अपने स्टार्टअप को हिंदी भाषियों के लिए भी लोकलाइज किया जाए, तो एकाएक आपकी प्रजेंस बढ़ जाती है. आपका टीजी बिना किसी खास एफर्ट के बेहद बड़ा हो जाता है.

कॉस्ट इफेक्टिव (Cost Effective Localization for your Startup)

क्योंकि आपके पास पहले से एक स्टैंडर्ड वर्किंग मॉडल है, स्टार्टअप ऑपरेशंस का एक सेट प्रोसेस है. ऐसे में अगर आप अपने Startup को लोकलाइज करने का फैसला करते हैं, तो आपको शुरू से सोचने की बजाय, एक आधार पहले से मिल जाता है.

कई बार तो ट्रांसलेशन ही इसमें बड़ी भूमिका निभा देता है. हालांकि लोकलाइजेशन का मतलब सिर्फ ट्रांसलेशन ही नहीं है, बल्कि लोकलाइजेशन इससे आगे की दुनिया है. क्योंकि आपके पास पहले से ही सेट प्रोसेस है, पहले से ही एक थॉट है, एक रास्ता है, जिस पर आप व आपकी स्टार्टअप टीम चल भी रही है.
ऐसे में लोकलाइजेशन करने में आपको इतनी अधिक कॉस्ट नहीं आती है, जितना कि मूल प्रोसेस डिवेलप करने में आई है. ऐसे में यह आपके लिए कॉस्ट इफेक्टिव रहता है. खासकर तब, जब आप कम खर्च में अधिक लोगों तक अपनी रीच बढ़ाना चाहते हैं.

इन्वेस्टमेंट एंगल (Investment factor for Startups)

जी हां! अगर आप लोकलाइजेशन की तरफ बढ़ते हैं, तो निश्चित रूप से यह वर्तमान समय में इन्वेस्टर्स को भी काफी अट्रैक्ट कर रहा है. अगर ऐसा न होता, तो इंडियन लैंग्वेज बेस्ड तमाम ऐप्स के लिए फंडिंग मिलना इतना आसान न होता!

अभी हाल ही में गूगल ट्रांसलेट ने संस्कृत और भोजपुरी सहित नौ भारतीय भाषाओं को अपने प्लेटफार्म पर जगह दी है. अब आप समझ सकते हैं कि हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु जैसी दूसरी प्रमुख भारतीय भाषाएं तो पहले से ही गूगल प्लेटफार्म पर उपलब्ध थीं. अब भोजपुरी, संस्कृत और डोंगरी इत्यादि भाषाओं को जब गूगल ने अपने प्लेटफार्म में समाहित किया है, तो निश्चित रूप से इसका एंगल यही है कि अधिक से अधिक लोगों तक, आसानी से, और इंगेजिंग तरीके से पहुंचा जाए.

ऐसे में आपका स्टार्टअप ना केवल लोगों को एक इंफॉर्मेशन देता है, बल्कि लोगों के साथ एंगेजमेंट भी बढ़ाता है. ज़ाहिर तौर पर उदाहरण दें तो अगर आप एक हिंदी भाषी व्यक्ति से इंग्लिश में कम्यूनिकेट कर रहे हैं, तो हो सकता है कि वह आपकी बात समझ जाए, किंतु वह बेहतर ढंग से अपनी ही भाषा में, अपने ही लोकल ढंग से एक्सप्रेस कर सकेगा, इस बात में दो राय नहीं!

ऐसे में अधिक लोगों तक आपकी रीच होने के साथ, आपके ब्रांड की प्रति इन्वेस्टर्स का रुझान भी निश्चित तौर पर बढ़ता है.

कल्चरली कनेक्टेड (Culturally connected Startup)

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि सिर्फ ट्रांसलेशन ही, लोकलाइजेशन नहीं है, बल्कि लोकलाइजेशन का असल मतलब है लोगों के कल्चर के साथ खुद के स्टार्टअप को जोड़ना!

ट्रांसलेशन तो गूगल भी करता है, किंतु हम सब जानते हैं कि गूगल ट्रांसलेशन को लोकलाइजेशन नहीं कहा जा सकता. लोकलाइजेशन का मतलब है कि बिल्कुल उनके अंदाज में, आपका एप्लीकेशन (Startup) उनसे न केवल इंटरेक्ट करें, बल्कि उनके बीच का ही लगे. ठीक वैसे ही, जैसे दूध में चीनी घुल जाती है. आपका टीजी (Target Group) यह कहने को मजबूर हो जाए कि 'यह तो अपना-सा लगता है.'

कल्पना कीजिए कि अगर आप भोजपुरी भाषी क्षेत्र में अपने ऐप की लोकप्रियता बढ़ाना चाहते हैं, तो अपनी वेबसाइट/ ऐप के ट्रांसलेशन के साथ-साथ, एक भोजपुरी कवि सम्मेलन कैसा रहेगा, जो आपके स्टार्टअप के साथ नेटिव ढंग से एसोसिएटेड दिखे.
जाहिर तौर पर इसे लोकलाइजेशन का एक बड़ा उदाहरण मान सकते हैं.

इसके अलावा लोकल इंटरेस्ट के हिसाब से सोशल मीडिया इंगेजमेंट, पोस्टस, ब्लॉग कंटेंट, ऑफलाइन / ऑनलाइन इवेंट्स आदि इसमें आपके स्टार्टअप की काफी हेल्प करती हैं.

निश्चित तौर पर आपके ऑफिस में बैठकर ट्रांसलेट करने से आपका स्टार्टअप लोकल कल्चर से कनेक्ट नहीं ही होगा, उसके लिए तो Startup Localization ही बेस्ट तरीका है.

तो देखा आपने, आपके स्टार्टअप के लिए लोकलाइजेशन कितना महत्वपूर्ण है. ऊपर बताये गए पॉइंट्स के अलावा सेल्स, सपोर्ट, रेफरल आदि डायनामिक ढंग से ग्रोथ इंडीकेट करने लगते हैं, अगर आपका स्टार्टअप लोकलाइजेशन के साथ अप्रोच करता है तो!

तो फिर देर किस बात की... अभी 14+ साल अनुभवी मिथिलेश को कॉल करें/  व्हाट्सअप करें (9971861612, 9990089080) एवं अपने Startup Localization के बारे में शुरूआती चर्चा करें. 

Web Title:  Localization for Startups, Hindi Article

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